सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

सितंबर, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पितृ पक्ष में भगवद्गीता का कौन सा अध्याय पढ़ना चाहिए? श्रीकृष्ण ने आत्मा और मृत्यु के बारे में क्या कहा? Pitru Paksha Mein Bhagawad Geeta

पितृ पक्ष में भगवद्गीता का कौन सा अध्याय पढ़ना चाहिए? श्रीकृष्ण ने आत्मा और मृत्यु के बारे में क्या कहा? क्या आपने कभी सोचा है कि... जब हमारे किसी प्रिय व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो वास्तव में उसके साथ क्या होता है? क्या मृत्यु के साथ सब कुछ समाप्त हो जाता है? या फिर शरीर के नष्ट होने के बाद भी आत्मा की यात्रा जारी रहती है? और जब पितृ पक्ष आता है, जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और प्रार्थना करते हैं, तब क्या भगवद्गीता हमें इस विषय पर कोई मार्गदर्शन देती है? भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को केवल युद्ध करने की शिक्षा नहीं दी थी। उन्होंने जीवन, मृत्यु, आत्मा, कर्म, पुनर्जन्म और परम सत्य के बारे में ऐसा ज्ञान दिया, जो आज भी मनुष्य के सबसे बड़े प्रश्नों का उत्तर खोजने में हमारी सहायता करता है। भगवद्गीता के अनुसार शरीर नश्वर है, लेकिन आत्मा को नष्ट नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि पितृ पक्ष के समय गीता के कुछ अध्यायों का अध्ययन और श्रवण मनुष्य को मृत्यु और आत्मा के विषय को आध्यात्मिक दृष्टि से समझने में सहायता कर सकता है। लेकिन सवाल है—...

नीम करौली बाबा कौन थे? | उनकी जीवन-कहानी और अद्भुत प्रसंग Neem Karoli Baba Kaun They Kanichi Dham

  नीम करौली बाबा कौन थे? | उनकी जीवन-कहानी और अद्भुत प्रसंग क्या आपने कभी ऐसे संत के बारे में सुना है... जिनके पास न कोई बड़ा आश्रम था, न राजसी ठाठ-बाट... लेकिन उनके चरणों में दुनिया के बड़े-बड़े लोग बैठते थे? एक ऐसे संत, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे लोगों के मन की बात बिना पूछे समझ लेते थे। एक ऐसे संत, जिनका नाम सुनते ही आज भी हजारों भक्तों के मन में श्रद्धा जाग उठती है। और सबसे बड़ी बात... वे लोगों से कहते थे— “सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो और भगवान को याद रखो।” यह कहानी है उस महान संत की, जिन्हें दुनिया नीम करौली बाबा , महाराजजी और नीब करौरी बाबा के नाम से जानती है। कहा जाता है कि उन्होंने कभी अपने चमत्कारों का प्रचार नहीं किया। वे हमेशा साधारण जीवन जीते रहे और लोगों को प्रेम, सेवा और भक्ति का मार्ग दिखाते रहे। लेकिन आखिर... नीम करौली बाबा कौन थे? उनका असली नाम क्या था? वे साधु कैसे बने? उनके जीवन में ऐसे कौन से प्रसंग हुए, जिन्हें भक्त आज भी चमत्कार मानते हैं? और क्यों भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लोग उनके चरणों में श्रद्धा लेकर पहुंचे? आज की इस पूरी कथा में हम जानें...

नीम करौली बाबा की मृत्यु का रहस्य | 11 सितंबर 1973 की अंतिम यात्रा, Neem Karoli Baba

नीम करौली बाबा की मृत्यु का रहस्य क्या था? जय श्री राम। जय हनुमान। 🙏 क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऐसे संत, जिनके पास हजारों लोग अपनी परेशानियां लेकर आते थे और जिन्होंने अपना जीवन प्रेम, सेवा तथा भगवान के नाम में समर्पित किया, उन्होंने अपने जीवन के अंतिम समय में क्या किया होगा? क्या उन्हें अपनी मृत्यु का पहले से पता था? क्या नीम करौली बाबा ने सच में अपने शरीर को छोड़ने का समय पहले ही जान लिया था? और सबसे बड़ा सवाल— 11 सितंबर 1973 की उस रात वृंदावन में ऐसा क्या हुआ था, जिसे आज भी भक्त नीम करौली बाबा की “महासमाधि” का रहस्य मानते हैं? आज की यह कथा केवल बाबा की मृत्यु की कहानी नहीं है। यह एक ऐसे संत की अंतिम यात्रा की कहानी है, जिनकी शिक्षाएं शरीर के समाप्त होने के बाद भी भक्तों के बीच जीवित रहीं। 🙏 ध्यान दें: नीम करौली बाबा के अंतिम समय से जुड़े कुछ विवरण आश्रम परंपरा, भक्तों के संस्मरण और आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसलिए जहां ऐतिहासिक या चिकित्सकीय प्रमाण स्पष्ट नहीं हैं, वहां उन्हें आस्था या परंपरा के रूप में ही समझना उचित है। नीम करौली बाबा कौन थे? ...

शनि चालीसा हिंदी | श्री शनि चालीसा | शनिदेव चालीसा - Shani Chalisa

शनि चालीसा हिंदी | श्री शनि चालीसा | शनिदेव चालीसा शनि चालीसा भगवान शनिदेव को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तुति है। हिंदू धर्म में शनिदेव को न्याय और कर्मफल के देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्त शनिवार के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ श्री शनि चालीसा का पाठ करते हैं और शनिदेव से सुख, शांति, सद्बुद्धि तथा जीवन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। इस लेख में आप शनि चालीसा हिंदी में पूरी पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां शनिदेव की पूजा का महत्व, शनिवार को शनि देव की पूजा करने की सामान्य विधि और शनि मंत्र की जानकारी भी दी गई है। शनिदेव की पूजा का महत्व शनि देव की पूजा में श्रद्धा, संयम और अच्छे आचरण को महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्त शनिवार के दिन शनिदेव का ध्यान करते हैं और अपने जीवन में सत्य, सेवा तथा सद्कर्मों को अपनाने का संकल्प लेते हैं। धार्मिक परंपराओं में शनिवार को शनिदेव के साथ भगवान हनुमान का स्मरण भी किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शनि मंत्र का जाप, शनि चालीसा का पाठ और पूजा-अर्चना करते हैं। शनिवार को शनिदेव...

श्री राधा चालीसा | राधा चालीसा हिंदी | Radha Chalisa

श्री राधा चालीसा | राधा चालीसा हिंदी | राधा रानी चालीसा श्री राधा चालीसा राधा रानी की भक्ति और महिमा का सुंदर स्तुति पाठ है। श्री राधा जी को भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय शक्ति और प्रेम स्वरूपिणी के रूप में भक्त श्रद्धा से स्मरण करते हैं। राधा रानी की भक्ति में राधा नाम का विशेष महत्व माना जाता है। इस लेख में आप राधा चालीसा हिंदी में पूरी पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां श्री राधा चालीसा का महत्व, पाठ करने की सामान्य विधि और राधा रानी की भक्ति से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें भी दी गई हैं। राधा चालीसा का पाठ कैसे करें? भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार राधा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। पाठ करते समय मन को शांत रखकर श्री राधा रानी का ध्यान करना और भक्ति भाव बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं। श्री राधा रानी का ध्यान करें और श्रद्धा से प्रणाम करें। सबसे पहले राधा नाम का स्मरण करें। श्रद्धा और एकाग्रता के साथ श्री राधा चालीसा का पाठ करें। पाठ के बाद अपनी मनो...

श्री शिव चालीसा | शिव चालीसा हिंदी | Shiv Chalisa

श्री शिव चालीसा | शिव चालीसा हिंदी | Shiv Chalisa श्री शिव चालीसा भगवान शिव को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण स्तुति है। हिंदू धर्म में भगवान शिव को महादेव, शंकर, भोलेनाथ, नीलकंठ और त्रिपुरारी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव चालीसा का पाठ करके भगवान शिव का स्मरण करते हैं। इस लेख में आप शिव चालीसा हिंदी में पूरी पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां शिव चालीसा का महत्व, भगवान शिव की पूजा विधि, शिव मंत्र, सोमवार की पूजा और चालीसा पाठ से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। शिव चालीसा का पाठ कैसे करें? भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार शिव चालीसा का पाठ कर सकते हैं। पूजा के समय मन को शांत और एकाग्र रखकर भगवान शिव का ध्यान करना महत्वपूर्ण माना जाता है। प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को स्वच्छ करें और भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं। भगवान शिव का ध्यान करते हुए श्रद्धा से प्रणाम करें। अपनी परंपरा के अनुसार शिवलिंग पर जल अर्पित करें। बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा से अर्पित कर...

लक्ष्मी माता की आरती | ॐ जय लक्ष्मी माता | Laxmi Aarti

लक्ष्मी माता की आरती | ॐ जय लक्ष्मी माता | Laxmi Aarti लक्ष्मी माता की आरती हिंदू धर्म में माता लक्ष्मी की उपासना के लिए गाई जाने वाली प्रसिद्ध आरती है। माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि, सौभाग्य और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ ॐ जय लक्ष्मी माता आरती का पाठ और गायन करते हैं। इस लेख में आप लक्ष्मी माता की आरती हिंदी में पूरी पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां लक्ष्मी पूजा का महत्व, आरती करने की विधि, शुक्रवार की पूजा और माता लक्ष्मी की उपासना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। लक्ष्मी माता की आरती कैसे करें? भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार माता लक्ष्मी की पूजा करके आरती कर सकते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का विशेष ध्यान रखना अच्छा माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके माता लक्ष्मी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। माता लक्ष्मी के सामने दीपक और धूप जलाएं। माता लक्ष्मी को पुष्प और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें। फल, मिठाई या सा...

हनुमान जी की आरती | आरती कीजै हनुमान लला की | Hanuman Aarti

हनुमान जी की आरती | आरती कीजै हनुमान लला की | Hanuman Aarti हनुमान जी की आरती भगवान श्री हनुमान को समर्पित एक प्रसिद्ध भक्तिपूर्ण आरती है। हनुमान जी को बजरंगबली, पवनपुत्र, अंजनी पुत्र और संकटमोचन जैसे नामों से भी श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। भक्त मंगलवार और शनिवार सहित अन्य दिनों में भी श्रद्धा से आरती कीजै हनुमान लला की गाते हैं। इस लेख में आप हनुमान जी की आरती हिंदी में पूरी पढ़ सकते हैं। साथ ही यहां हनुमान आरती का महत्व, पूजा विधि, हनुमान मंत्र, मंगलवार की पूजा और आरती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। हनुमान जी की आरती कैसे करें? भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार हनुमान जी की पूजा करके आरती कर सकते हैं। पूजा के समय स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता का ध्यान रखना अच्छा माना जाता है। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करके हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। हनुमान जी के सामने दीपक और धूप जलाएं। लाल पुष्प और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें। हनुमान जी का ध्यान करते हुए श्रीराम...